वक्त के मुसलसल रफ्तार में जिंदगी के उठा-पटक और सांसों की उलझती डोर के साथ दुनिया का सबसे बड़ा सत्य मौत जिंदगी के पैराहन में आती है और सब कुछ खत्म हो जाता है। पर कुछ खलिश कुछ तड़प कुछ चाह अधूरी ही रह जाती है...। अगर जाने से पहले उसकी बानगी नहीं होती तो वो तड़प खामोश हो कर उस 'सत्य' को भी कचोटती रहती है..। इसलिए मरने से पहले खुल कर जीना जरूरी है..और कह दो जो कभी नहीं कह सके तो.... आओ कह दो सब कुछ और जी लो अपनी जिंदगी