Tuesday, 14 August 2012

इस आज़ादी का मतलब क्या है?


आंखे सनी है लहू रंग में
रूह बदन की कांपी है
इस आजादी का मतलब क्या है?
जो सांस पे भी भारी है..

तब था मुल्क में सोना चांदी
अब तो भ्रष्टाचारी हैं
इस आजादी का मतलब क्या है?
जो सांस पे भी भारी है..

जब देश अंग्रेजों की पाश में
बंधा चीख चिल्लाता था
तब खून बहा मां के बेटों ने
पाश मुक्त करवाया था
कुछ भी याद नहीं इस मुल्क को
भूल गए वो यादें सारी है
इस आजादी का मतलब क्या है?
जो सांस पे भी भारी है..
शहिदों की शहादत को भूला
सब, जगजाहिर है
आतंक भूख की साए में
सोती जनता सारी है
इस आजादी का मतलब क्या है?
जो सांस पे भी भारी है..

क्या यही स्वाधिन हुए थे हम?
क्या यही हमारी आजादी है?
20 रुपए में चलती
हमारी दिन रात की पारी है
इस आजादी का मतलब क्या है?
जो सांस पे भी भारी है..

सूख गए खेतों के पानी
सूखे वृक्षों की डाली है
तू भूल सिंहसन पर बैठो हो
ये तुम्हरी नहीं हमरी है
इस आजादी का मतलब क्या है?
जो सांस पे भी भारी है..

शंख नाद समय का फिर से सुनो
भूडोल बवंडर उठने वाला है
होगा फिर से राजतिलक
जागी अबाम अब सारी है
इस आजादी का मतलब क्या है?
जो सांस पे भी भारी है..
जो सांस पे भी भारी है..

Friday, 10 August 2012

वक्त ना रुकेगा

वक्त न रुका है ना रुकेगा
दिल का दर्द ना कोई देखा है ना देखेगा
आज गम में कोई नहीं सरीक होने वाला
कल खुशियों की दामन में आएंगे हजार चाहने वाला

आज के दर्पण में जो कल खोजेगा
आसमनी बुलंदियों को बस वही चुमेगा
वक्त ना रुका है ना रुकेगा....

हर सांस लेने से हर सांस उखड़ता रहेगा
मोम की कतरों की तरह ज़िंदगी का सफर कटता रहेगा
जो गम के भंवर में खुशियां टटोलेगा
वही ज़िंदगी को हर पल जी पाएगा
वक्त ना रुका है ना रुकेगा....

कोई नहीं इन सांसो को गिननेवाला
कोई नहीं पल को एक पलभर भी थामने वाला
जो हर पल को जो हर सांस में जीएगा
वही हालात को बदल पाएगा
वक्त ना रुका है ना रुकेगा
दिल का दर्द ना कोई देखा है ना देखेगा...

Wednesday, 8 August 2012

आओ जी लो अपनी ज़िंदगी


बहुत हो गया तकरार जहां से...
मिला ना कुछ भी ऐसा
सब ने कहा मैं हूं, मैं हूं कोई नहीं कहा हम है
कोई नहीं है इस जग में भइया
जो करे तुम्हारी बंदगी...
छोड़ो चलो हम भी चलते हैं
आओ जी लो अपनी ज़िंदगी....आओ जी लो अपनी ज़िंदगी