आंखे सनी है लहू रंग में
रूह बदन की कांपी है
इस आजादी का मतलब क्या है?
जो सांस पे भी भारी है..
तब था मुल्क में सोना चांदी
अब तो भ्रष्टाचारी हैं
इस आजादी का मतलब क्या है?
जो सांस पे भी भारी है..
जब देश अंग्रेजों की पाश में
बंधा चीख चिल्लाता था
तब खून बहा मां के बेटों ने
पाश मुक्त करवाया था
कुछ भी याद नहीं इस मुल्क को
भूल गए वो यादें सारी है
जो सांस पे भी भारी है..
शहिदों की शहादत को भूला
सब, जगजाहिर है
आतंक भूख की साए में
सोती जनता सारी है
इस आजादी का मतलब क्या है?
जो सांस पे भी भारी है..
क्या यही स्वाधिन हुए थे हम?
क्या यही हमारी आजादी है?
20 रुपए में चलती
हमारी दिन रात की पारी है
इस आजादी का मतलब क्या है?
जो सांस पे भी भारी है..
सूख गए खेतों के पानी
सूखे वृक्षों की डाली है
ये तुम्हरी नहीं हमरी है
इस आजादी का मतलब क्या है?
जो सांस पे भी भारी है..
शंख नाद समय का फिर से सुनो
भूडोल बवंडर उठने वाला है
होगा फिर से राजतिलक
जागी अबाम अब सारी है
इस आजादी का मतलब क्या है?
जो सांस पे भी भारी है..
जो सांस पे भी भारी है..
इस आजादी का क्या मतलब जो सांसों पे भारी है........
ReplyDeleteदिल की बात लिख डाली.....वाकई....आज़ादी अभी अधूरी है.....