Sunday, 2 September 2012

मेरी मुहब्बत....एक इबादत

नकाम-ए-मोहब्बत /मुकाम-ए-मोहब्बत
बारिश की एक बूंद ने मुझे जला दिया
फिर तेरी याद ने मुझे भिंगा दिया
ये प्यार नहीं तो और क्या है...?
भरी जख्मों के दर्द को फिर से जगा दिया.....

मुहब्बत इंसान की जरूरत है अगर इंसान के अंदर से मुहब्बत मिट जाय तो इंसान का बजूद कुछ भी नहीं रह जाता.......। मुहब्बत के कई रूप होते हैं मुहब्बत इंसान से जानवर से निर्जीव से दरख्तों से जगहों से और हर किसी से भी हो सकता है....। प्यार में वो शक्ती है जो पाषाण को भी इंसान बना दे...। प्यार से दुनिया का हर चीज को जीता जा सकता है.....। प्यार इंसान को सोहब्त सिखाता है जीने का तरिका सिखाता है...प्यार इंसान को इंसान होने का अहसास दिलता है...प्यार तो भगवान का दुसरा रूप होता......। प्यार हर किसी को नसीब भी नहीं होता है.....प्यार तो किस्मत वालो के हाथों की लकीर होता है.............।
पर आज के जमाने जिस तरह से हर चीज का एक अलग मायने हो गया है उसी तरह प्यार को भी लोग को भी लोग एक दायरे में ला कर रख दिया है...और लोग प्यार शब्द को प्रियेसी का पर्यावाची मानने लगे हैं........।और प्यार का जिक्र होते है एक लड़की का खयाल तुरंत मेरे दिमाग में आ जाता है.....।
प्यार जो भी हो पर इतना तो है ही की जबतक इंसान को प्यार नहीं होता तब तक सही मायने में इंसान इंसान ही नहीं होता...इंसान अपना बजूद तभी समझ पाता है जब वो प्यार को समझता है....।प्यार में इतना दम होता है कि इंसान इसके बल पर बुलंदियों को चुम सकता है...पर तभी जब प्यार में निश्छलता हो साफगोई हो..और समर्पण हो...बिना समर्पण प्यार पूरा ही नहीं होता..।
जो लोग कहते है प्यार तो जिंदगी तबाह करता है तो मैं सोचता हूं ये प्यार है ही नहीं क्योंकि प्यार में हिंसा है ही नहीं प्यार तो बनाने के लिए होता है बिगाड़ने के लिए नहीं....।अगर प्यार में दिल टूटता भी है तो वो बर्बाद नहीं करता वो भी उसे आगे बढ़ने के लिए प्रेरित ही करता....।
प्यार तो मैं भी किया.... दिल मेरा भी टूटा.... पर मैं बिगड़ैल और भंयकर आशिक का रूप नहीं ले सका....और तभी महसूस किया की प्यार तो सिर्फ समर्पण की वस्तु है......और आज भी मैं प्यार करता हूं उसी से जो मेरे सपनों को पहली बार रंगीन किया था.....उसी से जो पहली बार मेरे धड़कन की रफ्तार को तेज की थी..उसी से जो पहली बार मेरे दिलो दिमाग पर छा कर मेरे जीन का अंदाज बदली...उसी से जो पहली बार मुझे मुझे से मिलाया.....उसी से जो पहली बार मेरी आंखों को मंजील से दिदार करबाया....उसी से जिसकी इबादत मैं आज भी करता हूं...।
उसी प्यार के लिए दिल से कुछ आवाज निकली जो मैं लिख कर बयां कर दिया..........................।।।।।।।।।।।।।।।।।।।




मुहब्बत में ऐसा मुकाम आया
हाथ में राख दिल जला अया
जब मैने पूछा उस बेवफा से उसकी रजा,
उसने कहा मैं तो तेरे मोहब्बत को कब्र में दफना आया
मजबूर मैं, लाजार मैं
मैं भी उसकी दुनिया उसकी महफिल छोड़ा आया
उसकी दुनिया उसे मुबारक, मैं तो अपनी दुनिया ही उसे दे आया
लोग कहते थे मोहब्बत मत करना, पर मैं तो यह गुनाह कर आया
जब मैं यह सोचने बैठा कि मैं यह सब मैं क्या कर आया?
देखा जब मुड़कर पीछे
मेरे सारे अपने मुझ से दूर नजर आया
दिल जल रहा था आग की लपेट में जिंदगी थी...
पर एक खलिश थी अभी भी बाकी
जला दिल के कतरों में एक हिस्सा अभी भी था बाकी...
वक्त हर जख्म पर मरहम लगाता.....
समय ने अपना रुख बदला...
बचे दिल के हिस्से से एक आवाज आई
ऐ दिल-ए-नादान तेरा कुछ भी नहीं बिगड़ा
तूं फिजुल में अपने आंखों में आंसु लाया
और फिर
मेरी जिंदगी ने फिर एक नई करवट ली
फिर से ये दुनिया रंगीन दिखने लगी
हर चीज में फिर से एक चमक आने लगी
पैदा हुआ था जो करने को,
मेरी आंखों को उसकी बेवफाई ने मंजिल दिखाई
शुरू हुआ सफर मंजिल के लिए...
और
एक ठोकर में मंजिल पा लिया
फिर एक बार देखा मुड़कर पीछे
तो याद आया
मुहब्बत में ऐसा मुकाम आया
हर सांस में जिंदगी
और                                     
दिल से सारा जहां को पाया........................................।

अगर इंसान सोच ले तो क्या नहीं कर सकता...इस दुनिया में कुछ भी नामुमकिन नहीं ...लेकिन इंसान अपने फितरत के आगे मजबूर है वो हमेशा ही अपनी मजबूती को कमजोरी बनाया है....पाक मुहब्बत हमेशा ही हमें आगे बढ़ने कुछ करने के लिए प्रेरित करता है....किसी के दूर जाना या संपर्क में नहीं रहाना या उसका हमशे नहीं बोलना ही दिल टूटना नहीं है.....प्यार में दिल कभी टूट ही सकता....प्यार तो पूजा है और अगर पूजा निहस्वर्थ हो फिर परमात्मा की प्रप्ती होती हैं हम दुख तब पाते हैं जब हम कामना रखते हैं अगर कामना रहित प्यार हो तो फिर दिल तो कभी टूट ही नहीं सकता...।
प्यार करने के लिए होता है ना कि हम किसी पर हम थोपें...प्यार में ये नहीं हो सकता कि अगर हम किसी से प्यार करते हैं तो वो भी मुझ से प्यार करे...प्यार तो प्यार है थोपने के बाद यही दुख का कारण बनता है और इंसान अपनी दुनिया को तबाह कर लेता है....इस इस पवित्र शब्द पर एक काली स्याही लगता है और फिर वो सबसे कहता है...प्यार मत करना प्यार जिंदगी तबाह करता है...जबकि ऐसा कुछ भी नहीं है...प्यार तो बस प्यार जो हमने किया बस प्यार किया प्यार किया....और प्यार किया....।

प्रणव झा

No comments:

Post a Comment