Friday, 19 April 2013

मौत की अमानत है जिंदगी...

मौत की पहलू में सो रही है
हर पल जिंदगी...

कब सहर हुई पता नहीं
बेवक्त ही सही
वो वक्त आ जाए, ये और है
मुकरर्र नहीं है
एक पल भी जिंदगी...

ये तेरा ये मेरा
कर के बिता रहा
शाम हर सवेरा
पर हर सांस
आखिरी है जिंदगी...

समझ नहीं पाते
हम देख कर भी
जब जब मौत की
पहलू में सोती रही है जिंदगी...

महसूस तो करते हैं
अहसास नहीं होता
पर जब अहसास होता है
तो कहां रही है ये जिंदगी...

वो तो शाश्वत है
आयेगा ही एक दिन
बिना उसके
ना जिएगी ये जिंदगी
क्योंकि मौत की अमानत है ये जिदंगी...।

प्रणव झा
(20-04-13)

Monday, 15 April 2013

नीतीश क्यों हुए नरम?


                      
देश का अगला पीएम ऐसा हो जो देश को एक साथ जोड़ कर ले चले और कभी टोपी भी पहने और कभी टीका भी करें...देश सद्भाव से चलता है जोर-जबरदस्ती से नहीं...दिल्ली में जदयू के दो दिवसीय राष्ट्रीय कार्यकारनी की बैठक में नीतीश कुमार ने भाजपा में पीएम पद के दावेदारी के लिए लक्ष्मण रेखा खिंचते हुए बोले...।और साथ ही नीतीश कुमार ने शरद यादव को अध्यक्ष पद के लिए चुने जाने पर बधाई दी...।

नीतीश कुमार ने इस बैठक में बिहार के विकास से लेकर देश में जारी राजनीतिक दौर पर भी खुब चर्चा की...और बातों ही बातों में दिल में छुपी अपनी भावना को भी अप्रत्यक्ष रूप से सब के सामने रख दिया...। और अपनी विकास की कहानी सुनाते हुआ कहा हम तो शून्य से शुरूआत किया है चाहे वो सड़क हो या शिक्षा या फिर कानून व्यावस्था का ही सवाल हो...। विकास की चार्चा करते हुए अपने तरकश के तीर अप्रत्यक्ष रूप से नरेंद्र मोदी पर भी चलाए और कहे हमारे पास समंदर नहीं की हम व्यापार करे...फिर भी हम विकास किए...। जिसकी चर्चा बिहार में ही नहीं पूरे देश के साथ पूरी दुनिया जानती है...।

नीतीश भले ही मोदी का नाम नहीं लिए फिर भी उनके अल्फाजों के तीर मोदी के पर ही वार करता नजर आया...। जहां एक तरफ मोदी के नाम पर नीतीश कोई समझौता करने के लिए तैयार नहीं है वहीं दूसरी तरफ बीजेपी को राहत भी दे दी कि आप के पास साल के अंत तक का समय है आप पीएम पद के लिए उम्मीदवार को घोषित करें...। नीतीश के इस नरम रुक से बीजेपी खेमा को राहत तो मिली पर अपने भाषण में नीतीश के मोदी पर वार से परेशान भी है...जिसका जिक्र पार्टी के प्रवक्ता निर्मला सितारमण ने मीडिया सम्मेलन में की और कही मोदी पर किसी भी तरह की टिप्पणी को हम मंजूर नहीं करते...।

खैर ये तो राजनीति है जो हमेशा ही चलती रहेगी...पर इन सबके बीच एक तस्वीर साफ हो गई है कि केद्र में क्षेत्रिय दलों की कद बढ़ती जा रही है और केंद्र में  बिना क्षेत्रिए दल के कोई सरकार नहीं बना सकती है...।

नीतीश कुमार के इस भाषण के बाद गठबंधन और विपक्षों की राय ली गई तो सबसे बड़ी बात ये निकल कर आई की कोई भी नेता या दल नीतीश के भाषण का आलोचना नहीं की...जहां तक मुख्या विपक्षी पार्टी कांग्रेस का सवाल है वो तो नीतीश के इस भाषण को हर मायने में सही करार दिया वहीं बीजेपी को गले में फसी हड्डी की तरह नजर आ वो ना तो नीतीश के भाषण को गलत कह सकते और ना ही सही क्योंकि नीतीश हर तरफ से बीजेपी को घेरा और मोदी के मुद्दे पर बांध कर रख दिया...। वहीं कांग्रेस मोदी पर नीतीश के विरोध से फुले नहीं समा रही और भविष्य में नीतीश को अपने गठबंधन में शामिल करने का प्रयत्न कर रही है...।
अब तो 2014 के चुनावी महासंग्राम में ही तय होगा कि नीतीश किस के साथ जाएंगे और देश किस दिशा में जाएगा और सत्ता की कुर्सी पर किस गठबंधन की सरकार बैठती है...।

प्रणव झा

मेरा बचपन बिक रहा है...

जाओ तुम भी
अपनी किस्मत आजमाओ...
लगा सकते हो तो
कीमत लगाओ...
वो घर नहीं
मेरा बचपन बिक रहा है...

हर सांस हर लम्हा
जिंदगी बिक रही है...
पर तुम तो जा रहे हो
मेरे हाथों की लकीर बेच कर...
हर पल हर सांस को छीन कर
तो जाओ...
जाओ तुम भी
अपनी किस्मत आजमाओ...
लगा सको तो
कीमत लगाओ...

(27-11-2012 को नेहा द्वारा लिखी ये कविता)

Monday, 1 April 2013

मुझे जगा तू सो गई....



रात रात भर जागी थी वो
जब तूं गहरी नींद में सोई
आज तुम्हें जगा कर वो
उसी नींद में सो गई
उसके नींद के सपने जब
दिल पर करता है वार
तेरे आंखों के क्षितिज पर
होता कई सावन बर्बाद
देख तेरे इस नक्श की सूरत
विचलित होता मन हर बार
हर बार निकलता एक ही सार
चुप हो जाओ...चुप हो जाओ...
जानता हूं...समझता हूं...
मेरे इन शब्दों का मेल
करता है तुम को आघात
कम नहीं कर सकता तेरे गम को
पर तेरी आंखों की नमी में
छू सकता मैं उस कमी को
हर क्षण हो के भी नहीं तूं
होती हर पल मेरे पास
उसके दीदी में हर पल खोती
पल पल भर का हर पल साथ
वो तो यहीं है देख रही है
बादल की घटाओं की छिट पुट टुकड़ों से
धूप छांव की बीच खड़ी वो
देख रही तेरी सूरत का रंग
तूं रोती है तो वो भी रोती है
बदलों की घनेरी घटाओं से
तूं हंसती है तो वो भी हंसती हैं
पुरबैया पवन की झोंको में
एक टक निगाहों से देखती वो
तुझको अपनी बांहों में आज भी
दूर ना कर उसको खुद से
बहां के अपनी आंखों से उसको
छोड़ खुद को खुदी में
अब वो तुझ में समाई है
सोई नहीं वो अब तो जगी है
तेरी चाहत की नए सबेरे में
सांझ हुई तो थक कर दिन भर
सोई है तेरी बांहो के भीतर
सोई नहीं वो अब तो जगी है
तेरी चाहत की नए सबेरे में

साभार- नेहा
प्रणव झा