समाजवाद के परचम के नीचे
सांस ले रहा उत्तर प्रदेश आज राम मनोहर लोहिया से सवाल पूछ रहा है कि मेरे दामन पर
लगते इस दाग का गुनहगार कौन है? कोई दिन ऐसा नहीं होता जब उत्तर प्रदेश सुर्खियों में नहीं
रहता। बलात्कार जैसा जघन्य अपराध यूपी में कभी भी कहीं भी हो सकता है क्योंकि हाल
के 10 दिनों में बिजनौर, नोएडा, बदायूं में ऐसी वारदात को सरेआम अंजाम दिया गया।
लूट और मर्डर तो अब यहां आम बात हो गई है। बात-बात पर गोली चलाना कोई बड़ी बात
नहीं है। उत्तर प्रदेश का शासन तंत्र इस कदर नकार हो चुका है कि अपराधी पूरे हौसले
के साथ वारदात को अंजाम दे कर सीना तान कर समाज में घूम रहे हैं।
बदायूं की जमीं अभी एक घटना
से पूरी तरह से उबर भी नहीं पाई थी कि जब दो नबालिग लड़कियों के साथ बलात्कार कर
के पेड़ से लटका कर मार दिया गया था कि फिर से यहां एक बार ऐसी नृसंस घटना को
अंजाम दिया गया कि भगवान की रूह भी कांप जाए। बदायूं के सिविल लाइन थाना क्षेत्र
में हैवानों ने एक किशोरी के साथ बलात्कार कर उससे प्राइवेट पार्ट में बोतल का
ढक्कन, माचिस का कवर, पौलीथिन, और लकड़ी का टुकड़ा डाल दिया। ओहहहहहहहहहहहह......
हम तो ये सुनने मात्र से ही कांप गए लेकिन जिस बच्ची के साथ ऐसी हैवानियत दरिंदों
ने किया उसका क्या हुआ होगा। वहीं नोएडा में एक युवती को उसके ही दोस्तों ने कोल
ड्रिंक्स में नशीली पदार्थ मिला कर उसके साथ बलात्कार किया। बिजनौर में एक महिला
को उसके पड़ोस के तीन लड़को ने गैंगरेप किया और फिर उसे तेजाब से जलाने की कोशिश
की।
इतना सब कुछ होने के बाद भी
सरकार को कोई फर्क नहीं पड़ता। ना तो कोई एक्शन हो रहा है ना ही रिएक्शन। क्योंकि
महत्वकांक्षा जब एक सोच से ऊपर बढ़ जाती है तो हर फर्क की लकीर मिट जाती है, और
खास कर तब जब सत्ता की कुर्सी की बात हो। इस 'तंत्र' के 'लोक' ऐसे हो चुके जिसे काटो
तो खून नहीं। एक बार तो ऐसा लगता है कि क्या इसी आज़ादी के लिए हमारे पुरोधाओं ने
अपना ख़ून बहाया था, जहां महिलाओं को लेकर समाज़ इतना कुंठित है। या फिर क्या समाज़वाद की
यही परिभाषा दी गई थी जहां समाज़ को एक विकृत मानसिकता की साथ आगे बढ़ना पड़े।
अज्ञानता के इस अंधेरे युग की कल्पना किसी ने भी नहीं की होगी। लेकिन हक़िकत यहीं
है कि जहां चांद और दूसरे ग्रह पर जाने की चलन हो वहां ये मुल्क शिक्षा से कोसो
दूर जा रहा है।






