Tuesday, 9 June 2015

कानून के जाल में 'कानून मंत्री'

जिस दिल्ली के कानून पर अधिपत्य जमा कर साहब कानून मंत्री बने थे आज उसी कानून की धाराओं ने उन्हें अपनी जाल में फंसा लिया। साहब पर धारा-420 और धारा-467 के तहत मामला दर्ज किया गया। साथ ही सबसे दिलचस्प बात तो ये हैं कि जिस दिल्ली पुलिस को एक चोर को ढूढ़नें  में पता नहीं कितने दिन लग जाते है वो दिल्ली पुलिस दिल्ली के कानून मंत्री जितेंद्र तोमर को गिरफ्तार करने में एक पल भी नहीं लगाई और मामला दर्ज होते ही साहब अंदर, तो भाईया अब क्या सोचें। सोचने पर मजबूर भी तो आप ही करते हो ना। खैर, इस पर बाद में बहस कर लेंगे।

तो भईया ये तोमर साहब के साथ कानून ने क्या मजाक किया है। एक तरफ देश के शिक्षा मंत्री पर सवाल उठे लेकिन सवाल की हैसयत इतनी नहीं कि शिक्षा मंत्री को खिलाफ कुछ जांच हो लेकिन यहां तो भाई कानून मंत्री की डिग्री पर बात उठी और दिल्ली पुलिस पहुंच गई मुंगेर जहां से पता जला कि तोमर साहब 1994 से लेकर 1999 तक पढ़ाई का दावा किये हैं पुलिस ने कॉलेज प्रशासन से तोमर के लॉ की मार्कशीट और रजिस्ट्रेशन से जुड़े दस्तावेज हासिल किए और जांच के लिए कई दस्तावेज साथ लेकर भागलपुर के तिलका मांझी विश्‍वविद्यालय गई थी।

तिलका मांझी विश्‍वविद्यालय से ही तोमर ने प्रोविजिनल सर्टीफिकेट हासिल किया है। यूनिवर्सिटी ने पुलिस को बताया है कि वहां से तोमर को कोई प्रोविजिनल सर्टीफिकेट नहीं दिया गया है।
दरअसल हाई कोर्ट के आदेश पर दिल्ली की बार काउंसिल ने इस मामले की जांच की और कहा कि तोमर की स्नातक और लॉ की डिग्री फर्जी हैं। बार काउंसिल ने बताया था कि उन्हें उत्तर प्रदेश की डॉ. राममनोहर लोहिया अवध विश्‍वविद्यालय से जानकारी मिली है कि तोमर ने वहां से स्नातक नहीं किया है।
वहीं भागलपुर के तिलका मांझी विश्‍वविद्यालय से मिली जानकारी का हवाला देते हुए बार काउंसिल ने कहा था कि तोमर जिस प्रोविजिनल सर्टीफिकेट की बात कर रहे हैं वो प्रोविजिनल सर्टीफिकेट नंबर 3687 संजय कुमार चौधरी के नाम है। संजय ने वहां से बीए किया था।
तो फर्जी डिग्री और धोखाधड़ी के मामले में मंत्री जी हो गए हैं गिरफ्तार। यूं ही पहले से ही केजरीवाल जी जंग लड़-लड़ के थक चुके हैं। अब फिर से नई जंग का एलान हुआ है तो केजरीवाल और उनका कुनावा बखूबी मैदान में डट चुके हैं। देखते हैं अब क्या होता है.............!!!!!!

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