Saturday, 13 June 2015

आज़ादी की मौत-3

  
मरता हुआ इंसान झूठ नहीं बोल सकता है...तभी तो जगेंद्र की बात पर आग फिर से सुलग उठी है। जगेंद्र ने अपनी टूटती सांस और इंसाफ की आश में जो बोला उससे सारी तस्वीर साफ हो जाती है।

‘ मुझे मारना था तो मार लेते, गिरफ्तार करना चाहते थे तो गिरफ्तार कर लेते... आग क्यों लगाए दिए...सारे पुलिस वाले राइफल तान के खड़े थे

यही बोल कर मर गया जगेंद्र...लेकिन मरने के कई दिन बाद जब वीडियो मीडिया और सोशल मीडिया पर छाया तो ठंड पड़ा माहौल फिर से गरमा गया। सवाल उठने लगे तो समाजवादी पार्टी के महासचिव प्रो. रामगोपाल यादव जी आए और कह दिए कि FIR दर्ज होने से कोई गुनहगार नहीं होता। इस बयान को सुन कर तो जगेंद्र की आत्मा भी मर चुकी होगी। जो अब तक इंसाफ की आश में भटक रही थी।

ये वही उत्तर प्रदेश है जहां समाज़वाद के आने के बाद क्राइम का ग्राफ आसमान छूने लगता है और ये वही समाज़वाद है जिसके सिद्धांत पर यहां का प्रसाशन अपनी पूरी ताकत नेता जी के भैंस को ढूंढने में लगाता हैं और साथ ही मंत्री जी के इशारे पर एक पत्रकार पर पेट्रोल डाल कर आग लगा देता है।

इस प्रदेश में कुछ भी हो सकता है यहां कोई भी महफ़ूज़ नहीं है क्योंकि समाजवाद की कुर्सी पर सरकार आंखों पर चाटूकारों की पट्टी लगा कर बैठे हैं। ये कभी नहीं बोलते हैं चाहे देश के चौराहे पर संविधान की मौलिकता और लोकतंत्र की आबरू क्यों ना लुट जाए।


इतना सब कुछ होने के बाद भी समाजवादी पार्टी का गुंडा मंत्री राममूर्ती सिंह वर्मा फरार है जिसपर पहले से ही बलात्कार का मुकदमा चल रहा है वो इस जघन्य अपराध के बाद भी मंत्री पद पर बना हुआ है। पत्रकार मर गया और उसके घरवाले समाज़वादी गुंडों के गुलाम पुलिस वालों के खिलाफ सज़ा की मांग कर रहे हैं लेकिन अखिलेश जी को फुर्सत नहीं है कि इंसाफ करें। 

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