Sunday, 26 May 2013

रिपोर्ट कार्ड या तस्सली

यूपीए-2 ने अपने दोनों पारी को मिला कर 9 साल पूरे करने पर जब जनता के सामने अपने रिपोर्ट कार्ड पेश किए तो तमाम उपलब्धियों की छड़ी लगा दी और देश के विकास संबंधी हर क्षेत्र में अपनी उपस्थिति को दर्ज करवा....और देश के अवाम को खुशहाल बनाने के लिए हर काम किए...ऐसा यूपीए के रिपोर्ट कार्ड में दर्ज है...।

पर मामला यहीं आ के खत्म नहीं होता...अगले साल चुनाव है और विपक्षी पार्टी भी किसी भी मोर्चे पर सरकार को बकसने की मूड में नहीं दिख रही...रिपोर्ट के अनुसार तो यूपीए ने देश के विकास के हर क्षितिज को छूआ है...पर जब हम जमीनी तौर पर देखते हैं तो तस्वीर कुछ अलग ही बनती दिख रही है....पिछले 9 साल में देश की जनता टीवी और अखबार में तमाम घपले-घोटाले और इंसानियत को तार तार करने वाली ब्रेकिंग और हेडलाइन देख देख कर थक चुकी है...तस्वीर बदलने के लिए हाथ में मसाल मोमबत्ती और जब्जों पर इंकलाब भी आए पर इस सबका रिपोर्ट देखे तो ढाक के तीन पात ही हैं...क्योंकि जनता के द्वरा चुनी ये सरकार पर कोई प्रभाव नहीं पड़ा जनाता चीख चीख कर चुप हो गई सरकार चीख सुन सुन कर भी चुप बैठी रही...।

रेल से लेकर खेल तक जो खेल खेला जा रहा है उसे भी जनता कान और आंख खोल कर देख सुन रही है...वो दौर खत्म हो गया जब नेता पूरे कार्यकाल के दौरन सिर्फ चुनाव के दिन अपने आकर्षक और लोक लुभवनी भाषण दे कर और जाती धर्म के नाम पर जनता को बांट कर अपनी जीत चुनाव से पहले ही पक्की कर लेते थे...समय के बिसात पर परिस्थियां अब और ही कुछ ही...लोग जागरुक हुए है...वो अब जनने लगे हैं और सही गलत में अंतर करना समझ चुके हैं...।

यूपीए सरकार अपनी उपलब्धियों का चाहे जितना भी पुल बांध ले...लेकिन वो जमीनी हकिकत को नहीं बदल सकती...और जमीनी हिकिकत क्या है वो 2014 के आम चुनाव में सबके सामने आ जाएगा..।
प्रणव झा

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