Monday, 4 August 2014

बिना पानी भी यहां आती है बाढ़!




सावन का महीना जब भी आता है तो पूरे देश में भक्तिमय माहौल बन जाता है। बोल बम के नारे के साथ देश में भोले के भक्त कांवर ले कर घूमने लगते हैं लेकिन इसी बीच सावन का डर भी पैदा होने लगता है सबसे पहले डरता है बिहार। बिहार में हर साल बाढ़ आती है लाखों घर उजड़ जाते हैं। कोशी, कमला, बगमती अपने सबाब पर आती है तो मातम ही मातम हर जगह दिखती है। बिहार बाढ़ से हर साल बर्बाद होता रहा है बाढ़ बिहार को हर साल अपने सैलाबों के साथ कई साल पीछे लेकर कर चली जाती है।

कोशी नदी को बिहार का शोक कहा जाता है। कोशी हर बार अपने इलाके में तांडव करती है। लेकिन इस बार सब कुछ उलटा है। कोशी नदी में हर साल की तरह पानी नहीं है। और ना ही वो उफान की किसी को नुकसान पहुंच सके। फिर भी मीडिया के हर शाख पर एक नयमित त्योहार की तरह बाढ़ को मनाना शुरू हो गया है, हर चैनल, हर अखबार में यही दिखाया जा रहा है कि किस तरह से कोशी, कमला अपना रौद्र रूप दिखा रही है। जबकि आप देखेंगे कि नदियों का जलस्तर क्या है तो आप अपने टीवी सेट पर चल रहे चैनल को देख कर ही पता लगा सकते हैं हकिकत क्या है। इन नदियों में इतना पानी भी नहीं है कि जिससे वो अपने पूरे जमीन को भिंगा सके जो जमीन वो अपने विशाल धार के लिए पहले से बना ली है।

जब इस तस्वीर को थोड़ा उलटा पुलटा कर देखते हैं तो कुछ और ही तस्वीर हमें नजर आती है। बाढ़ से जितना नुकसान सूबे को होता है उतना ही फायदा जनप्रतिनिधि को होता है। इस बार फिर से जबकि बाढ़ का कोई नामोनिशान नहीं है बिहार में सरकारी स्तर पर पूरा माहौल बना दाया गया है कि कोशी में भयंकर बाढ़ आ गई है। और राहत कार्य के लिए राज्य सरकार पूरे जोर-शोर से लगी हुई है इससे पूरा करने के लिए केंद्र से भी मदद की गुहार लगाई जा चुकी है। ठीक है ये तो हो गई वो बातें जो मीडिया में अखबार में छपी या चली है। अब जब हम थोड़ा और अंदर झांक कर देखते हैं तो पता चलता है कि अंदर तो और अंधेरा है।

कोशी के किनारे बसे जितने भी गांव हैं वहां बाढ़ के नाम पर जबरदस्त कंपेनिंग की जा रही है। लोगों को राहत शिविर में ले जाया जा रहा है। राहत शिविर के नाम पर एक मुश्त राशि राज्य सरकार से अनुमोदित किया गया है। और जो लोग उस इलाके में बसे हैं उसे वहां से निकाल कर राहत शिविर में रखा जा रहा है जो नहीं आना चाहते उसे डरा-धमका कर वहां लाया जा रहा है। इस संदर्भ में जब वहां के एक स्थानिय निवासी से बात हुई तो उसने कहां कि ये लोग आते हैं और कहते हैं अपना घर खाली कर के यहां से निकल जाओ। जब हम जाने के लिए नहीं तैयार होते हैं तो हमें धमकी दी जाती है। हमें डरा धमका कर अपने घर से निकाल दिया जाता है और जब हम लोग उस राहत शिविर में चले जाते हैं तो हमारे घर में लूट पाट की जाती है।

आज जब मीडिया बाढ़ पर अपना पूरा फोकस कर रहा है तो लाजमी है कि लोग सच्चाई से दूर हो जाएंगे। लेकिन जिस बाढ़ के आने से खतरा पहले हुआ करता था वो खतरा आज भी बाढ़ के नहीं आने से भी है क्योंकि वहां के लोगों को दोनों ही सूरत में अपना सब कुछ गवाना ही है। चाहे उसे बाढ़ ले जाए या फिर बाढ़ के नाम पर लूटेरे ले जाए।  

जो मीडिया सच्चाई दिखाने के लिए अपने आप को समाज का दर्पण कह रहा है उसे यहां क्यों नहीं सच्चाई दिख रही है क्यों हवा में उड़ती बातों को जमीनी हकीकत मान रहा है मीडिया। 

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